भगवान् देवनारायण जी की प्रशस्ति में

भगवान् देवनारायण जी की प्रशस्ति में

देव की महिमा न्यारी

24 बगडावतों में था,

सबसे महान सवाई भोज।

मां भवानी व महादेव की,

अखंड सेवा करता रोज। 


पाकर वरदान महादेव से,

12 वर्ष की काया माया का।

कुंआ बावड़ी यज्ञ हवन कर,

व्रत लिया प्रजा की सेवा का। 


वचन निभाने के खातिर,

वैर कर लिया राणा से,

जयमती का किया श्रृंगार,

नरमुंडों की माला से।


न्याय के लिए हुआ था,

जैसे युद्ध महाभारत।

खारी नदी का युद्ध भी था,

वैसा ही बगड़ावत भारत। 


माघ शुक्ल सप्तमी को,

जन्मा था विष्णु अवतारी।

जन्म नाम था उदय सिंह, 

बाद में पड़ा देव चमत्कारी। 


दीन दु:खियों की कर सेवा, 

समाज में फैलाया उजियारा।

अत्याचारी राणा से पा मुक्ति,

गढ़ गोठा को पु:न बसाया। 


कोढ़ियों का कोढ़ मिटाकर,

कर दी कंचन सी काया।

महादेव ने सवाई भोज को,

12 वर्ष की दी खूब माया। 


कलयुग में भी खूब पूजाया,

खूब बढ़ी महिमा चारों ओर।

जय-जय कार हो रही है, 

देवनारायण जी की चंहूओर। 


हंसराज हंस देव जयंती को, 

करता है सबसे यह आह्वन। 

रोज प्रातः जल्दी उठकर,

धरे देव जी का सब ध्यान।

रचनाकार


हंसराज हंस 

बनेठा 

टोंक (राजस्थान)

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