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शिक्षक राजेश का आत्मकथ्य

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शिक्षक राजेश का आत्मकथ्य आज मुझे यह संतोष प्राप्त हुआ कि मैं, शिक्षक राजेश पाल मीणा, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सेदरी के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक छोटा-सा प्रयास कर सका। अपने निजी संसाधनों से विद्यालय के छात्र-छात्राओं को देव धाम जोधपुरिया (निवाई) का शैक्षिक भ्रमण करवाने का सौभाग्य मिला। इस शैक्षिक यात्रा का उद्देश्य केवल भ्रमण नहीं, बल्कि बच्चों को संस्कृति, आस्था, अनुशासन और सामूहिक जीवन के मूल्यों से परिचित कराना था। यात्रा के दौरान विद्यार्थियों के लिए भोजन-प्रसादी की समुचित व्यवस्था भी की गई, जिससे वे पूरे मनोयोग और उत्साह के साथ इस अनुभव का आनंद ले सकें। इस पूरे आयोजन में विद्यालय के समस्त स्टाफ का अनुकरणीय सहयोग, मार्गदर्शन और अनुशासनात्मक समर्थन प्राप्त हुआ। साथ ही एसएमसी अध्यक्ष एवं अन्य सहयोगियों की सहभागिता ने इस कार्य को सफल और स्मरणीय बनाया। मैं हृदय से यह अनुभव करता हूँ कि ऐसे सामूहिक प्रयास ही शिक्षा को पुस्तकों से आगे जीवन से जोड़ते हैं। इस अवसर पर सहयोग देने वाले सभी साथियों के प्रति मैं पुनः हार्दिक आभार और धन्यवाद व्यक्त करता हूँ। 🙏🙏 झलकिया...

नवाचार

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नवाचार   पाँच अच्छे कार्य चरित्र निर्माण की एक सोच विद्यालय केवल पाठ्यपुस्तकों का केंद्र नहीं है; यह व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला भी है। उप-प्राचार्य सुनीता मीणा अक्सर यही विचार मन में लेकर विद्यालय परिसर में बच्चों को देखती थीं। उनके मन में बार-बार एक प्रश्न उठता था—क्या केवल शैक्षणिक उपलब्धियाँ ही शिक्षा का उद्देश्य हैं? या फिर हमें बच्चों के भीतर जिम्मेदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता के बीज भी रोपने चाहिए? इसी चिंतन ने एक नवाचार को जन्म दिया। सुनीता मीणा ने निर्णय लिया कि यदि बच्चों को आदेश देकर नहीं, बल्कि उनकी अंतरात्मा को जगाकर अच्छे कार्यों की ओर प्रेरित किया जाए तो परिणाम अधिक प्रभावी होंगे। उन्होंने एक सरल किंतु प्रभावशाली योजना बनाई—“प्रतिदिन पाँच अच्छे कार्य”। योजना स्पष्ट थी। कोई दबाव नहीं, कोई दंड नहीं, केवल प्रेरणा। हर बच्चा प्रतिदिन पाँच अच्छे कार्य स्वयं चुने और उन्हें पूरे मन से करे। ये कार्य छोटे हो सकते थे— पौधों में पानी देना, विद्यालय परिसर में पड़ी गंदगी उठाना, फर्नीचर व्यवस्थित करना, अनावश्यक जलती लाइट-पंखे बंद करना, कक्षा या कमरों के गेट ठीक से बं...