संघर्ष, संकल्प और सफलता की मिसाल है ज्योति धामा

 🎙️ विशेष साक्षात्कार

संघर्ष, संकल्प और सफलता की मिसाल है ज्योति धामा

प्रश्न १. ज्योति जी, सबसे पहले आपको इस शानदार सफलता के लिए हार्दिक बधाई। 19वीं रैंक हासिल करने का अनुभव कैसा रहा?

उत्तर: "बहुत-बहुत धन्यवाद। यह मेरे लिए सिर्फ एक परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, धैर्य और विश्वास की जीत है। जब परिणाम आया तो एक पल के लिए विश्वास ही नहीं हुआ, लेकिन अगले ही क्षण माता-पिता के चेहरे की खुशी देखकर लगा कि मेरी मेहनत सार्थक हो गई।"

प्रश्न २. आपके इस सफर की शुरुआत कैसे हुई? क्या शुरू से ही सिविल सेवा का लक्ष्य था?

उत्तर: "नहीं, शुरुआत में मेरा लक्ष्य शिक्षक बनने का था। मैंने डीएलएड भी किया था। लेकिन मेरी सहेली आंचल धामा ने मुझे सिविल सेवा की तैयारी के लिए प्रेरित किया। उसी दिन मैंने ठान लिया कि अब मुझे अपने जीवन को एक बड़े उद्देश्य के लिए समर्पित करना है।"

प्रश्न ३. एक साधारण किसान परिवार से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचना—यह यात्रा कितनी चुनौतीपूर्ण रही?**

उत्तर: "चुनौतियां हर कदम पर थीं—संसाधनों की कमी, सही मार्गदर्शन का अभाव, और कई बार आत्म-संदेह भी। लेकिन मैंने कभी अपने हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। मेरे माता-पिता ने सीमित साधनों में भी मुझे आगे बढ़ने का हौसला दिया, वही मेरी सबसे बड़ी ताकत बनी।"

प्रश्न ४. आपने अपनी तैयारी का तरीका कैसे तय किया? क्या कोचिंग का सहारा लिया?

उत्तर: "प्रारंभिक स्तर पर मैंने मवाना में कोचिंग ली, लेकिन बाद में मैंने स्वाध्याय के साथ साथ ऑनलाइन शिक्षा का भी सहयोग  लिया। मैंने ऑनलाइन शिक्षा का भरपूर फायदा उठाया।

मैं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कई कोचिंग इंस्टीट्यूटस जैसे जय हो स्टडी,रोजगार विथ अंकित,स्टडी iq,pwonlyias आदि से जुड़ी।

इन सभी संस्थानों के मॉक इंटरव्यू ने भी मेरी काफी हेल्प की और मुझे सकारात्मक टिप्स दिए जिससे मुझे साक्षात्कार में बहुत हेल्प मिली।

मैंने सीमित संसाधनों में ही अधिकतम उपयोग करना सीखा। निरंतरता और आत्म-अनुशासन मेरे लिए सबसे अहम रहे।"

प्रश्न ५. आपकी सफलता में आपके परिवार का कितना योगदान रहा?

उत्तर: "मेरा पूरा परिवार मेरी ताकत है। मेरे पिता किसान हैं, लेकिन उन्होंने कभी मेरी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। मेरी माँ ने हर मुश्किल समय में मुझे मानसिक संबल दिया। भाई-बहनों का सहयोग भी हमेशा मेरे साथ रहा। उनकी उम्मीदों ने ही मुझे कभी हार नहीं मानने दी।"

प्रश्न ६. आपने बिहार पीसीएस का इंटरव्यू भी दिया और उसी दौरान यूपी पीसीएस का परिणाम आया—उस समय आपकी मानसिक स्थिति कैसी थी?

उत्तर: "वह समय बहुत भावनात्मक था। एक तरफ इंटरव्यू का दबाव था और दूसरी तरफ परिणाम की प्रतीक्षा। जब यूपी पीसीएस में सफलता की खबर मिली, तो वह मेरे जीवन का सबसे यादगार क्षण बन गया। यह मेरे लिए आत्मविश्वास का सबसे बड़ा स्रोत बन गया।"

प्रश्न ७. आपने यूपीपीसीएस-2025 की परीक्षा बीच में ही छोड़ दी—यह निर्णय कितना कठिन था?

उत्तर: "यह निर्णय भावनाओं से जुड़ा हुआ था, लेकिन उस समय मुझे लगा कि मेरी मेहनत का फल मिल चुका है और अब मुझे अगले चरण की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। यह मेरे जीवन का एक अनोखा और भावनात्मक निर्णय था।"

प्रश्न ८. आपके अनुसार सफलता का सबसे महत्वपूर्ण मंत्र क्या है?

उत्तर: "मेरे अनुसार सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है—निरंतरता और आत्मविश्वास। यदि आप हर दिन थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ते हैं, तो एक दिन आप बहुत आगे निकल जाते हैं। साथ ही, खुद पर विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी है।"

प्रश्न ९. आज की बेटियों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगी?

उत्तर: "मैं यही कहना चाहूंगी कि बेटियाँ किसी से कम नहीं हैं। अगर आपके अंदर कुछ करने का जज्बा है, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती। अपने सपनों को पहचानिए, उन्हें अपना लक्ष्य बनाइए और पूरी निष्ठा से उसके लिए काम कीजिए।"

प्रश्न १०. आपके आगे के लक्ष्य क्या हैं?

उत्तर: "मेरा लक्ष्य सिर्फ एक पद पाना नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। मैं चाहती हूँ कि मेरी सेवाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और मैं उनके जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकूं।"

✨ समापन✨

ज्योति धामा की यह कहानी केवल एक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि यह उस अटूट संकल्प और समर्पण की मिसाल है, जो यह सिखाती है कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है।

सूचना स्रोत 

सेठीराम 

चांद समंद, जिला मुजफ्फरनगर 

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 








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